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चीन के साथ सैन्य वार्ता का ‘कोई बाहरी मुद्दा’ से कोई संबंध नहीं: भारत


नई दिल्ली: भारत ने गुरुवार को कहा कि सीमा विवाद को लेकर चीन (चीन) के साथ उसकी सैन्य वार्ता का किसी भी बाहरी मुद्दे से कोई संबंध नहीं है। यह टिप्पणी हाल ही में सम्पन्न भारत-अमेरिका 2 2 + 2 ‘वार्ता की पृष्ठभूमि में आई है, जिसमें दोनों देशों ने पूर्वी लद्दाख और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की सैन्य आक्रामकता पर चर्चा की और एक रणनीतिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए।

इस मुद्दे पर सहमति बनी
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव (अनुराग श्रीवास्तव) ने चीन के साथ कोरेंडरर-स्तरीय वार्ता के अगले दौर के बारे में कहा कि दोनों पक्ष सैन्य और राजनयिक माध्यमों से बातचीत जारी रखने और जल्द से जल्द सैनिकों की वापसी के लिए राष्ट्रीय रूप से व्यावहारिक किसी समाधान पर पहुंचने के लिए सहमत हुए हैं। ।

‘बाहरी मुद्दे से कोई संबध नहीं’
श्रीवास्तव ने कहा, ‘मैं यह स्पष्ट कर दूं कि इसके और किसी बाहरी मुद्दे के बीच कोई संबंध नहीं है।’ चीन के साथ सीमा विवाद से जुड़े सवालों के अलावा यह सवाल भी किया गया था कि चीन ने भारत और अमेरिका के बीच क्या किया था। बुनियादी बातचीत और सहयोग समझौते (बीईसीए) को लेकर विधान वार्ता के अगले दौर में देरी की है।

विदेश मंत्री ने कही थी ये बात
विदेश मंत्री ने कहा था कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर हमारी वार्ता में विशेष ध्यान था। हमने इस क्षेत्र में सभी देशों के लिए समृद्धि, शांति और शांति के महत्व को माना है। उन्होंने कहा, यह तभी संभव है जब नियमों पर आधारित आंतरिक व्यवस्था कायम होने, आंतरिक समुद्रों में नौसाद की आजादी सुनिश्चित हो। सभी राज्यों की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का सम्मान हो।

12 अक्टूबर को भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच हुई सैन्य वार्ता के अंतिम दौर का जिक्र करते हुए श्रीवास्तव ने कहा कि इससे दोनों पक्षों के बीच गहन विचार-विमर्श हुआ और एक-दूसरे के रुख को लेकर समझ बढ़ी। उन्होंने कहा, दोनों पक्ष सैन्य और राजनयिक माध्यमों से बातचीत जारी रखने और जितनी जल्दी हो सके, सैनिकों की वापसी के लिए गुप्ता रूप से संवेदनशील समाधान पर पहुंचने के लिए प्रतिस्पर्धी हुए थे।

7 दौर की बातचीत के बाद सफलता नहीं मिली
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि दोनों पक्ष दोनों देशों के नेताओं के बीच इस समझ पर सहमत हुए कि मतभेदों को विवादों में नहीं बदलने दिया जाए और सीमावर्ती क्षेत्रों में संयुक्त रूप से शांति की रक्षा करें। सीमा विवाद को लेकर दोनों पक्षों के बीच अब तक उच्च स्तरीय सैन्य वार्ता के 7 दौर आयोजित किए गए हैं। हालांकि टकराव वाले स्थानों से सैनिकों की वापसी को लेकर कोई सफलता नहीं मिली है। भारत का यह रुख रहा है कि पर्वतीय क्षेत्र में टकराव वाले स्थानों से सैनिकों की वापसी और तनाव में कमी के लिए प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी चीन पर है।

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